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कोई मचà¥à¤›à¤° काट ले तो टेंशन में न आà¤à¤‚। हर मचà¥à¤›à¤° डेंगू वाला नहीं होता। बà¥à¤–ार आ जाठतो à¤à¥€ घबराने की जरूरत नहीं। हर बà¥à¤–ार डेंगू का नहीं होता। डेंगू हो à¤à¥€ जाठतो पैनिक न हों। डेंगू में सिरà¥à¤« 1 फीसदी माले ही रिसà¥à¤•ी होते हैं। बà¥à¤–ार का मैनेजमेंट घर में करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° से इलाज कराà¤à¤‚। जब तक डॉकà¥à¤Ÿà¤° न कहे, असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ न हों। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ से बात करके डेंगू से बचाव और इलाज पर जानकारी दे रही हैं
कà¥à¤¯à¤¾ है बà¥à¤–ार
जब हमारे शरीर पर कोई बैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या वायरस हमला करता है तो हमारा शरीर अपने आप ही उसे मारने की कोशिश करता है। इसी मकसद से शरीर जब अपना टेमà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤šà¤° बढ़ाता है तो उसे ही बà¥à¤–ार कहा जाता है। जब à¤à¥€ शरीर का टेमà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤šà¤° नॉरà¥à¤®à¤² (98.3) से बढ़ जाठतो वह बà¥à¤–ार माना जाà¤à¤—ा। आमतौर पर छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बà¥à¤–ार होने पर उनके हाथ-पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गरà¥à¤® रहते हैं इसलिठउनके पेट से उनका बà¥à¤–ार चेक किया जाता है। क·ई बार बà¥à¤–ार 104-105 डिगà¥à¤°à¥€ फॉरनहाइट त·क à¤à¥€ पहà¥à¤‚च जाता है।
कहीं यह बà¥à¤–ार डेंगू तो नहीं
• डेंगू वाले मचà¥à¤›à¤° के किसी इंसान को काटने के बाद डेंगू का वायरस इंसान के बà¥à¤²à¤¡ में 2-7 दिनों तक रहता है।
• डेंगू बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ मचà¥à¤›à¤° के काटने के 4-7 दिनों में दिखते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ इसमें 14 दिनों का वकà¥à¤¤ à¤à¥€ लगता है।
• बà¥à¤–ार अकà¥à¤¸à¤° तेज होता है और दिन में 4-5 बार आता है।
• डेंगू बà¥à¤–ार तकरीबन 7-10 दिनों तक बना रहता है और अपने आप ठीक हो जाता है। बà¥à¤–ार से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤² लोगों में से 10 फीसदी को ही हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² ले जाने की जरूरत होती है।
• डेंगू के सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ हैं: बà¥à¤–ार, तेज़ बदन दरà¥à¤¦, सिर दरà¥à¤¦ खास तौर पर आंखों के पीछे, शरीर पर दाने आदि।
• डेंगू à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥€ हो सकता है कि इसके लकà¥à¤·à¤£ न उà¤à¤°à¥‡à¤‚। à¤à¤¸à¥‡ मरीज़ का टेसà¥à¤Ÿ करने पर डेंगू पॉजिटिव आता है लेकिन वह खà¥à¤¦-ब-खà¥à¤¦ बिना किसी इलाज़ के ठीक हो जाता है।
• दूसरी तरह का डेंगू बीमारी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ वाला होता है। यह à¤à¥€ तीन किसà¥à¤® का होता है: कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤•ल डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®à¥¤
• कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤•ल डेंगू फीवर à¤à¤• नॉरà¥à¤®à¤² वायरल फीवर है। इसमें तेज बà¥à¤–ार, बदन दरà¥à¤¦, तेज सिर दरà¥à¤¦, शरीर पर दाने जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं। यह डेंगू 5-7 दिन के सामानà¥à¤¯ इलाज से ठीक हो जाता है।
• डेंगू हेमरेजिक फीवर थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ और W.B.C. की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने लगती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना या सà¥à¤•िन पर गहरे नीले-काले रंग के चकतà¥à¤¤à¥‡ जैसे लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ हो सकते हैं।
• डेंगू शॉक सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® में मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, उसका बीपी और नबà¥à¤œ à¤à¤•दम कम हो जाती है और तेज बà¥à¤–ार के बावजूद सà¥à¤•िन ठंडी लगती है।
• डेंगू के बचाव के लिठमचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ को पैदा होने से रोकना और काटने से रोकना, दोनों जरूरी हैं:
• कहीं à¤à¥€ खà¥à¤²à¥‡ में पानी रà¥à¤•ने या जमा न होने दें। साफ पानी à¤à¥€ गंदे पानी जितना ही खतरनाक है। पानी पूरी तरह ढककर रखें। कूलर, बाथरूम, किचन आदि में जहां पानी रà¥à¤•ा रहता है में दिन में à¤à¤• बार मिटà¥à¤Ÿà¥€ का तेल डाल दें। à¤à¤¸à¤¾ करने से उनमें मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के अंडे डिवेलप नही होंगे।
• à¤à¤¸à¥€: अगर विंडो à¤à¤¸à¥€ के बाहर वाले हिसà¥à¤¸à¥‡ के नीचे पानी टपकने से रोकने के लिठटà¥à¤°à¥‡ लगी हà¥à¤ˆ है तो उसे रोज खाली करना न à¤à¥‚लें। उसमें à¤à¥€ बà¥à¤²à¥€à¤šà¤¿à¤‚ग पाउडर डाल कर रख सकते हैं।
• कूलर: इसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बंद कर दें। अगर नहीं कर सकते तो उसका पानी रोज बदलें और उसमें बà¥à¤²à¥€à¤šà¤¿à¤‚ग पाउडर या बोरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ जरूर डालें।
• गमले: ये चाहे घर के à¤à¥€à¤¤à¤° हों या बाहर, इनमें पानी जमा न होने दें। गमलों के नीचे रखी टà¥à¤°à¥‡ à¤à¥€ रोज खाली करना न à¤à¥‚लें।
• छत: छत पर टूटे-फूटे डिबà¥à¤¬à¥‡, टायर, बरà¥à¤¤à¤¨, बोतलें आदि न रखें या उलटा करके रखें। पानी की टंकी को अचà¥à¤›à¥€ तरह बंद करके रखें। पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को दाना-पानी देने के बरà¥à¤¤à¤¨ को रोज पूरी तरह से खाली करके साफ करने के बाद पानी à¤à¤°à¥‡à¤‚।
• किचन, बाथरूम: सिंक/वॉशबेसिन में à¤à¥€ पानी जमा न होने दें। हफà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤• बार अचà¥à¤›à¥€ तरह से सफाई करें। पानी सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करने के बाद बरà¥à¤¤à¤¨ पूरी तरह ढक कर रखें। बेहतर तो यह है कि गीले कपड़े से à¤à¤¸à¥‡ बरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को ढकें ताकि मचà¥à¤›à¤° को जगह न मिले। नहाने के बाद बाथरà¥à¤® को वाइपर और पंखे की मदद से सà¥à¤–ा दें।
• डà¥à¤°à¥‰à¤‡à¤‚गरूम: घर के अंदर सà¤à¥€ जगहों में हफà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤• बार मचà¥à¤›à¤°à¤¨à¤¾à¤¶à¤• दवाई का छिड़काव जरूर करें। डाइनिंग टेबल में सजाने के लिठरखे फूलों या फूलों के बरà¥à¤¤à¤¨ में पानी रोज बदलें
• आउटडोर में पूरी बांह की शरà¥à¤Ÿ, बूट, मोजे और फà¥à¤² पैंट पहनें। खासकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठइस बात का जरूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
• मचà¥à¤›à¤° गाढ़े रंग की तरफ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं इसलिठहलà¥à¤•े रंग के कपड़े पहनें।
• तेज महक वाली परफà¥à¤¯à¥‚म लगाने से बचें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मचà¥à¤›à¤° किसी à¤à¥€ तरह की तेज महक की तरफ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं।
• कमरे में मचà¥à¤›à¤° à¤à¤—ानेवाले सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡, मैटà¥à¤¸, कॉइलà¥à¤¸ आदि का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें। मसà¥à¤•िटो रेपलेंट को जलाते समय सावधानी बरतें। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जलाकर कमरे को 1-2 घंटे के लिठबंद कर दें। सोने से पहले खिड़की-दरवाजे खोल लें। खिड़की, दरवाजे बंद रखेंगे तो सांस की बीमारी हो सकती है।
• घर की मेन à¤à¤‚टà¥à¤°à¥‡à¤‚स के बाहर लगी टà¥à¤¯à¥‚ब लाइट के पास मसà¥à¤•िटो रेपलेंट (गà¥à¤¡à¤¨à¤¾à¤‡à¤Ÿ, ऑलआउट आदि) जलाकर रखें। इससे गेट खà¥à¤²à¤¨à¥‡ पर अंदर आनेवाले मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ को रोका जा सकेगा। आजकल इसे 24 घंटे जलाकर रखें ताकि मचà¥à¤›à¤° को जगह न मिले।
• सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खà¥à¤²à¥‡ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ पर विकà¥à¤¸ लगाà¤à¤‚। इससे मचà¥à¤›à¤° पास नहीं आà¤à¤‚गे।
• à¤à¤• नीबू को बीच से आधा काट लें और उसमें खूब सारे (6-7) लौंग घà¥à¤¸à¤¾ दें। इसे कमरे में रखें। मचà¥à¤›à¤° à¤à¤¾à¤— जाà¤à¤‚गे।
• मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ को à¤à¤—ाने और मारने के लिठगà¥à¤—à¥à¤—à¥à¤² जलाà¤à¤‚।
• लैवेंडर ऑयल की 15-20 बूंदें, 3-4 चमà¥à¤®à¤š वनीला à¤à¤¸à¥‡à¤‚स और चौथाई कप नीबू रस को मिलाकर à¤à¤• बोतल में रखें। शरीर के खà¥à¤²à¥‡ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ पर लगाने से पहले अचà¥à¤›à¥€ तरह मिलाà¤à¤‚। इसे लगाने से मचà¥à¤›à¤° दूर रहते हैं।
• तà¥à¤²à¤¸à¥€ का तेल, पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का रस, लहसà¥à¤¨ का रस या गेंदे के फूलों का रस शरीर पर लगाने से à¤à¥€ मचà¥à¤›à¤° à¤à¤¾à¤—ते हैं।
बढ़ाà¤à¤‚ इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€
• इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ यानी बीमारियों से लड़ने की शरीर की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ अचà¥à¤›à¥€ हो तो कोई à¤à¥€ बीमारी आपको आसानी से दबोच नहीं पाती। इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ाने के लिठबैलेंसà¥à¤¡ डाइट लें। मौसमी फल, हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, दाल, दूध-दही आदि खूब लें। हालांकि इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ à¤à¤•-दो दिन में नहीं बढ़ती। इसके लिठलंबे समय तक रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना पड़ता है।
• खाने में हलà¥à¤¦à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। सà¥à¤¬à¤¹-शाम आधा-आधा छोटा चमà¥à¤®à¤š हलà¥à¤¦à¥€ पानी या दूध के साथ लें।
• तà¥à¤²à¤¸à¥€ के 8-10 पतà¥à¤¤à¥‡ शहद के साथ मिलाकर लें या तà¥à¤²à¤¸à¥€ के 10 पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को आधे गिलास पानी में उबालें। पानी आधा रह जाठतो उसे पी लें।
• विटामिन-सी से à¤à¤°à¤ªà¥‚र चीजों जैसे आंवला, संतरा, मौसमी आदि रोजाना लें।
• आधा चमà¥à¤®à¤š अशà¥à¤µà¤—ंधा सोने से पहले à¤à¤• गिलास गरà¥à¤® दूध के साथ लें।
• रोजाना 2 ताजे आंवले का रस या à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š इसका चूरà¥à¤£ लें।
• सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट लहसà¥à¤¨ की दो कलियां ताजे पानी के साथ ले सकते हैं।
• बकरी का दूध पीने से à¤à¥€ इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ती है।
• à¤à¤• कप पानी में à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š गिलोय का पाउडर या इसकी 4-5 इंच की डंडी, 2 काली मिरà¥à¤š और तà¥à¤²à¤¸à¥€ के 8-10 पतà¥à¤¤à¥‡ मिलाकर पानी में उबालें और उसमें आधा नीबू मिलाकर पी लें। à¤à¤¸à¤¾ महीना à¤à¤° करने से किसी à¤à¥€ तरह का बà¥à¤–ार होने का खतरा कम हो जाता है।
• होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• दवा यूपाटोरियम परफोलिà¤à¤Ÿà¤® 30 C (Eupatorium Perfoliatum) लें। बड़े 5 गोली और बचà¥à¤šà¥‡ 2 गोली रोजाना 3 दिन तक खाली पेट लें सकते हैं।
डेंगू के लिठपà¥à¤°à¤®à¥à¤– टेसà¥à¤Ÿ
• डेंगू के लिठ3 पà¥à¤°à¤®à¥à¤– टेसà¥à¤Ÿ होते हैं: à¤à¤‚टिजन बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ (NS1), डेंगू à¤à¤‚टिबॉडी और पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ काउंट।
• अगर बà¥à¤–ार के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ 1-3 दिन में टेसà¥à¤Ÿ कराना है तो NS1 करा सकते हैं, लेकिन 4-5 दिन बाद टेसà¥à¤Ÿ कराते हैं तो à¤à¤‚टिबॉडी टेसà¥à¤Ÿ (डेंगू सिरॉलजी) कराना बेहतर है। टोटल काउंट और WBC और RBC आदि का अलग-अलग काउंट कराना चाहिà¤à¥¤
• दिलà¥à¤²à¥€ में सरकार ने NS1 डेंगू टेसà¥à¤Ÿ की कीमत 600 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡, डेंगू à¤à¤‚टिबॉडी टेसà¥à¤Ÿ 600 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ और पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ काउंट की 50 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ तय कर दी है।
• डेंगू की लैबोरेटà¥à¤°à¥€ जांच में मरीज के खून में à¤à¤‚टिजन IgM और IgG à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ NS-1 देखे जाते हैं। NS-1 की मौजूदगी से यह पता चलता है कि मरीज के अंदर डेंगू वायरस का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है लेकिन जरूरी नहीं कि उसे डेंगू फीवर हो।
• IgM व IgG में से अगर केवल IgG पॉजिटिव है तो इसका मतलब है कि मरीज को पहले कà¤à¥€ डेंगू रहा है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ इन तीनों में से किसी के à¤à¥€ पॉजिटिव होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° मरीज में डेंगू का डर पैदा करके उनसे ठगी कर लेते हैं।
• डेंगू में पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ और PCV दोनों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है। PCV बà¥à¤²à¤¡ में रेड बà¥à¤²à¤¡ सेलà¥à¤¸ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बताता है। यह सेहतमंद पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में 45 फीसदी और महिलाओं में 40 फीसदी होता है। डेंगू में बढ़ सकता है। इसके बढ़ने का मतलब खून का गाढ़ा होना है। अगर PCV बढ़ रहा है तो खतरनाक है।
• हेलà¥à¤¦à¥€ आदमी के शरीर में डेढ़ से 4.5 लाख तक पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ होते हैं। अगर पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ 1.5 लाख से कम आà¤à¤‚ तो घबराने की जरूरत नहीं। हर 2-3 दिन में पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ का टेसà¥à¤Ÿ करवाते रहें। अगर तबियत न बिगड़े तो 5-8 दिनों में टेसà¥à¤Ÿ कराà¤à¤‚। इलाज से अगर पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ बढ़ने लगें तो पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ का अंतराल बढ़ा कर 14 दिन तक कर सकते हैं। à¤à¤• बार 1.5 लाख से ऊपर पहà¥à¤‚च जाने पर तकरीबन 1 महीने पर टेसà¥à¤Ÿ कराà¤à¤‚। पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ काउंट 3 लाख तक पहà¥à¤‚चने तक टेसà¥à¤Ÿ कराà¤à¤‚।
• पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे हों तो पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ चढ़ाने पड़ते हैं। हालांकि अगर बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग नहीं है तो इससे नीचे आने पर à¤à¥€ कई बार पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती।
डेंगू की पाठशाला
• डेंगू का वायरस मूल रूप से चार तरह का होता है। डेन1, डेन2, डेन3 और डेन4 सेरोटाइप।
• डेन1 और डेन3 सेरोटाइप का डेंगू डेन2 सेरोटाइप और डेन4 सेरोटाइप के मà¥à¤•ाबले कम खतरनाक होता है।
• इस साल डेन2 और डेन4 ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखने को मिल रहा है।
• à¤à¤®à¥à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पहली बार à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† है कि डेन4 सेरोटाइप वाला डेंगू दिलà¥à¤²à¥€ में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फैल रहा है। इसका साथ डेन2 सेरोटाइप का डेंगू दे रहा है।
घर में डेंगू मरीज की देखà¤à¤¾à¤²
• 100 डिगà¥à¤°à¥€ तक बà¥à¤–ार है तो दवा की जरूरत नहीं है।
• बà¥à¤–ार और शरीर दरà¥à¤¦ को मैनेज करने के लिठपैरासिटामॉल दें। बà¥à¤–ार होने पर मरीज को हर 6 घंटे में पैरासिटामोल की à¤à¤• गोली दें। यह मारà¥à¤•ेट में कà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ (Crocin), कालपोल (Calpol) आदि बà¥à¤°à¥ˆà¤‚ड नेम से मिलती है। दूसरी कोई गोली डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछे बिना न दें। किसी à¤à¥€ बà¥à¤–ार में à¤à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¨ (डिसà¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¨ आदि), कॉमà¥à¤¬à¤¿à¤«à¥à¤²à¥‡à¤®, निमोसà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡, बà¥à¤°à¥‚फेन आदि बिलà¥à¤•à¥à¤² न लें।
• अगर बà¥à¤–ार 102 से ऊपर है तो मरीज के शरीर पर सामानà¥à¤¯ पानी की पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ रखें। पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाà¤à¥¤ ठंडे पानी की पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ या सà¥à¤ªà¤‚ज बाथ से बà¥à¤–ार बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ उतर जाà¤à¤—ा।
• मरीज को ठंडी जगह पर आराम करने दें। à¤à¤¸à¥€ या कूलर चलाà¤à¤‚ रखें।
• मरीज को नहाना बंद नहीं करना चाहिà¤à¥¤ नॉरà¥à¤®à¤² पानी या हलà¥à¤•े गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से नहाना बेहतर है।
• उसे जबरन चादर ओढ़ने को न कहें। पसीना आने पर बà¥à¤–ार चला जाता है, यह सोच सही नहीं है।
• मरीज का खाना बंद न करें। वह जो खाना चाहते हैं, खाने दें।
• पानी खूब पिलाà¤à¤‚। साथ में नीबू पानी, छाछ, लसà¥à¤¸à¥€, दूध, जूस, नारियल पानी आदि à¤à¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र दें। रोज तकरीबन 4-5 लीटर लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ लें। हर 2 घंटे या उससे पहले à¤à¥€ कà¥à¤›-न-कà¥à¤› लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ जरूर लें। डेंगू में हालात तà¤à¥€ खराब होते हैं जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
• तकरीबन हर 3-4 घंटे में पेशाब आना खतरे से बाहर रहने की निशानी है।
• बà¥à¤–ार के वकà¥à¤¤ मरीज के सांस फूलने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें। खासतौर पर तब जब पेशंट को बà¥à¤–ार न हो। अगर बà¥à¥à¤–ार न होने पर à¤à¥€ पेशंट की सांस फूल रही है तो उसे डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚।
• डेंगू पहली बार में उतना खतरनाक नहीं होता, जितना दोबारा होने पर होता है। जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहले डेंगू हो चà¥à¤•ा है, वे खासतौर पर बचाव पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें।
• जब तक तेज बà¥à¤–ार है तो डरने की जरूरत नहीं। डेंगू में कई बार चौथे-पांचवें दिन बà¥à¤–ार कम होने पर पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ गिरने लगते हैं। बà¥à¤–ार खतà¥à¤® होने के 3-4 दिन बाद à¤à¥€ à¤à¤• बार पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ काउंट टेसà¥à¤Ÿ करा लें।
• डेंगू के मरीज को मचà¥à¤›à¤°à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ के अंदर रखें ताकि मचà¥à¤›à¤° उसे काटकर दूसरों में बीमारी न फैलाà¤à¤‚।
• डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है।
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